अन्धविश्वास के चलते डेढ़ साल के कुपोषित मासूम को 36 बार गर्म सलाखों से दागा

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मप्र में कुपोषण पर काबू पाने में नाकाम हो रही सरकार
– अचेत अवस्था में हरदा अस्पताल में कराया भर्ती
-जिले के कई क्षेत्रों में हैं कुपोषित बच्चे

भोपाल। मप्र में सरकार के करोड़ों रुपए फूंकने के बाद भी कुपोषण का कलंक मिटने का नाम नहीं ले रहा है, जबकि सरकार गाहे-बगाहे करती रहती है कि प्रदेश में कुपोषण पर काबू पा लिया गया है। जबकि जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मप्र में अब भी भारी संख्या में कुपोषित बच्चों के मामले सामने आ रहे हैं। इसके अलावा प्रदेश में कुपोषण को लेकर अंधविश्वास भी हावी हो रहा है। सरकार के लाख जतन के बावजूद भी जब कुपोषण पर लगाम नहीं लग पा रहा है तो ऐसे में ग्रामीण अपने स्तर पर इससे जूझ रहे हैं। कुपोषण मिटाने के लिए क्या-क्या कदम उठा सकते हैं ये कोई सोच भी नहीं सकता। दरअसल, अंधविश्वास के चलते मप्र के हरदा जिले के भीमपुरा गांव डेढ़ साल के कुपोषित मासूम को गर्म सलाखों से 36 जगह दागा गया। ये दाग अंधविश्वास और अशिक्षा की कहानी बोलते गढ़ते नजर आते हैं। ये दाग दूर-दूर तक विकास और व्यवस्था सुधारने के दावों की पोल खोलने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर चल रहे सरकारी कार्यक्रमों के वास्तविकता को बयां करते हैं। हाल ही में खिरकिया ब्लॉक के वनाचंल सांवलखेड़ा गांव में भी एक ऐसा मामला सामने आया है। जहां कुपोषण को दूर करने के लिए पड़िहारों ने 36 से अधिक बार बच्चे को गर्म सलाखों से दाग दिया। भीमपुरा गांव के आदिवासी परिवार का डेढ़ साल का बेटा कुपोषित होने की स्थिति में हरदा जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मासूम के पेट पर करीब 3 दर्जन से दाग के निशान हैं। दरअसल, लोहे के नुकीले औजार जैसे हंसिया की नोक को गर्म कर ये चाचुआ लगाने की अंधविश्वासी परंपरा इन परिवारों में है।

– अचेत अवस्था में अस्पताल में कराया भर्ती
हरदा जिला अस्पताल में भर्ती कराने के दौरान बच्चा अचेत स्थिति में था। गंभीर हालत में बच्चे को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां मासूम का इलाज जारी है। बच्चा फिलहाल मां के साथ अस्पताल में है।
महिला बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर का कहना है कि उन्हें इस बच्चे की जानकारी थी, लेकिन तब भी बच्चे को उपचार नहीं मिल पाना कई सवाल खड़े करता है। सुपरवाइजर का कहना है कि उनके अंडर में आने वाली 19 आंगनबाड़ी केंद्रों में वर्तमान में लगभग 70 से अधिक बच्चे कुपोषण का शिकार हैं। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वन ग्रामों में कुपोषण को लेकर महिला बाल विकास विभाग कितना सजग है।

-सीवियर एक्यूट मॉलन्यूट्रीशन से पीड़ित है बच्चा
बच्चे का इलाज कर रहे डॉ. पटेल ने बताया कि बच्चे की हालत में सुधार है। यह बच्चा सीवियर एक्यूट मॉलन्यूट्रीशन से पीड़ित है। भर्ती के दौरान बच्चा अचेत स्थिति में था। वैसे बच्चे को भोपाल, इंदौर रेफर की सलाह भी दी थी लेकिन यह नहीं ले गए। उन्होंने बताया कि बच्चे के पेट पर लोहे के सरिये से दागे जाने के निशान हैं। यह परिवार की अशिक्षा और अन्धविश्वास को बताता है। इसे रोकना चाहिए। इससे बच्चों को टिटनेस के साथ अन्य इन्फेक्शन का खतरा होता है, जो जानलेवा है।

– बच्चे की नानी ले गई थी बाबा के पास
बच्चे की मां ने बताया कि बच्चा पैदा हुआ, जब से कुपोषित है। करीब तीन महीने पहले भीमपुरा में ससुराल पक्ष के लोगों से बच्चे के इलाज कराने की बात कही, लेकिन उन्होंने नहीं सुना। इसके बाद बच्चे को लेकर मां अपने मायके सांवलखेड़ा चली गई। वहां पर परिवार के लोगों ने बच्चे की हालत देखी और पड़िहार (बाबा) से झांड फूंक कराने की बात कही। बाबा ने कहा कि बालक पर भूत-प्रेत का साया है, जिसे गर्म सलाखों से दागेंगे। इसके बाद चूल्हे की जलती आग से लोहे की गर्म सलाख निकाली और मासूम के पेट पर लगा दिया। मासूम दर्द से चीख उठा, आंखों से आंसू बह निकले। इसके बाद भी पड़िहार नहीं माना और एक बार और गर्म सरिया पेट पर लगा दिया।

– सात बच्चों में सबसे ज्यादा कुपोषित था ये बच्चा
सांवलखेड़ा क्षेत्र की महिला सुपरवाइजर ने बताया कि कुछ दिनों पहले हमने सांवलखेड़ा गांव में शिविर लगाया था। वहां पर करीब 7 बच्चे कुपोषित मिले थे, जिसमें से यह मासूम अत्यधिक कुपोषित मिला। बच्चे की जांच की गई तो उसके पेट पर निशान दिखाई दिए। पूछने पर परिवार के लोगों ने बताया कि बच्चे को स्वस्थ करने के लिए बाबा ने लोहे के सरिये से दागा हैं। इसके बाद उसे पोषण केंद्र में भर्ती कराया गया। उन्होंने बताया कि परिवार की बिना अनुमति बच्चे को भर्ती कराया था।

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