इस वर्ष का दूसरा सूर्यग्रहण 21 को,  कई लोगों पर होगा ग्रहण का असर

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  • भोपाल। इस वर्ष 21 अगस्त को पड़ने वाला सूर्यग्रहण पूर्ण सूर्यग्रहण होगा। इस वर्ष का दूसरा सूर्यग्रहण है। कहा जा रहा है कि यह ग्रहण यूरोप, उत्तर-पूर्व एशिया, उत्तर-पश्चिम अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका में पश्चिम, दक्षिण अमेरिका, प्रशांत, अटलांटिक, आर्कटिक की ज्यादातर हिस्सों में मुख्य रूप से दिखेगा। 99 सालों बाद अमेरिकी महाद्वीप में पूर्ण सूर्यग्रहण होगा। अमेरिका में सुबह 10.15 मिनट से सूर्यग्रहण आॅरेगन के तट से दिखने लगेगा और दक्षिण कैरोलीना के तट पर दोपहर 2.50 बजे खत्म होगा। उत्तरी अमेरिका के सभी हिस्से में आंशिक सूर्यग्रहण देखा जा सकेगा। जानकारों का मानना है कि सूर्यग्रहण भारत में नहीं दिखेगा, लेकिन भारत में रहने वाले लोगों पर इसका आंशिक प्रभाव पड़ेगा। गर्भवती महिलाओं को ग्रहण के समय बाहर नहीं निकलना चाहिए।

    -सूर्यग्रहण में ये रखें ध्यान
    सूर्यग्रहण एक रोचक खगोलीय घटना है। सूर्यग्रहण के बारे में हिंदू धर्म में बहुत सी बातें कहीं गई हैं। इनके अनुसार पौराणिक मान्यताओं के अनुसार सूर्यग्रहण के बाद पवित्र नदियों और सरोवरों में स्नान कर देवता की आराधना करनी चाहिए। स्नान के बाद गरीबों और ब्राह्मणों को दान देने की परंपरा है। मान्यता है कि इससे ग्रहण के प्रभाव में कमी आती है। यही कारण है कि सूर्यग्रहण के बाद लोग गंगा, यमुना, गोदावरी आदि नदियों में स्नान के लिए जाते हैं और दान देते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार, सूर्यग्रहण में ग्रहण शुरू होने से चार प्रहर पूर्व भोजन नहीं करना चाहिए। बूढ़े, बालक और रोगी एक प्रहर पूर्व तक खा सकते हैं। यह भी माना जाता है कि ग्रहण के दिन पत्ते, तिनके, लकड़ी, फूल आदि नहीं तोड़ना चाहिए।

    – गर्भवती महिला को नहीं देखना चाहिए ग्रहण
    माना जाता है कि गर्भवती स्त्री को सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण नहीं देखना चाहिए, क्योंकि उसके दुष्प्रभाव से शिशु को प्रभावित कर सकता है। यह मान्यता भी प्रचलित है कि सूर्यग्रहण के समय बाल और वस्त्र नहीं निचोड़ने चाहिए और दांत भी नहीं साफ करने चाहिए। ग्रहण के समय ताला खोलना, सोना, मल-मूत्र का त्याग करना और भोजन करना भी वर्जित है। सूर्यग्रहण या चंद्रग्रहण के दौरान किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत को बिल्कुल मना किया जाता है। मान्यता है कि इस दौरान शुरू किया गया काम अच्छा परिणाम नहीं देता है।

    -इस तरह होता है ग्रहण
    सूर्य ग्रहण उस वक्त होता है, जब चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता हैं। पूर्ण सूर्यग्रहण की स्थिति उस वक्त उत्पन्न होती है, जब चंद्रमा पृथ्वी को पूरी तरह से अपनी छाया में ले लेता है। ऐसे में सूर्य की किरणें धरती पर नहीं पहुंच पातीं और अंधेरा छा जाता है। दूसरा, आंशिक सूर्यग्रहण होता है, इसमें चंद्रमा सूर्य के कुछ हिस्से को ढक लेता है। ऐसी स्थिति के समय पृथ्वी के कुछ हिस्सों में सूर्य नजर नहीं आता है। तीसरे ग्रहण को वलयाकार सूर्य ग्रहण कहते हैं, इसमें चंद्रमा सूर्य को इस प्रकार से ढक लेता है कि सूरज का मध्य हिस्सा ही इससे ढक पाता है और सूर्य का बाहरी हिस्सा दिख रहा होता है। बता दें कि ज्योतिषों के अनुसार, सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन होता है।

    -ये है सूर्यग्रहण का समय
    जानकारों के मुताबिक 21 अगस्त को रात 9 बजकर 16 मिनट पर सूर्य ग्रहण प्रारंभ होगा और रात्रि 2.34 बजे समाप्त होगा। वहीं जिन देशों में ग्रहण दिखाई देगा वहां ग्रहण का सूतक 12 घंटे पूर्व यानी 21 अगस्त सुबह के 11.51 बजे से लग जाएगा। ऐसा कहा जा रहा है कि ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन इसका प्रभाव जरूर राशियों पर पड़ेगा।
    पंडित सुनील शर्मा का कहना है कि जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष है या राहु-केतु की दशा-अंतर्दशा चल रही है या जिनकी कुंडली में सूर्य या चंद्र ग्रहण दोष बना हुआ है उन पर भी ग्रहण का ज्यादा असर होगा। ग्रहण का प्रभाव 30 दिनों तक रहता है।

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