एमपी गजब है! कागजों में बन गए स्टॉप डेम और खेत तालाब

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  • लाखों के वारे-न्यारे कर रहीं वाटर शेड समितियां
    किसानों को नहीं मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

भोपाल। किसानों की बेहतरी के लिए जिला पंचायत के माध्यम से चलाई जा रही सिंचाई और उन्नत कृषि संबंधी विभिन्न योजनाएं अधिकारियों के उदासीनत रवैये के चलते कागजों में ही दम तोड़ रही हैं। हालांकि इन संस्थाओं को शासन से करोड़ों रुपए का बजट भी मिलता है। जी हां, जिला पंचायत के अधीन वाटर शेड समितियों के माध्यम से चल रही इन योजनाओं के तहत निर्मित अधिकांश स्टॉप डेम और खेत तालाब केवल कागजों में ही बने हैं। सूत्रों की मानें तो स्टॉप डेम के नाम पर इन समितियों ने गांव के आसपास या कुछ चहेते किसानों के खेतों के पास खाली पड़ी सरकारी जमीन पर छोटे-मोटे गड्ढेनुमा खेत तालाब निर्माण कर अपने दायित्व की इतिश्री कर ली। वहीं कुछ संस्थाएं महिलाओं के स्व-सहायता समूहों का गठन कर उन्हें नाममात्र का लोन देकर वाहवाही लूट रही हैं। किसानों की खुशहाली से इनका कोई लेना-देना नहीं है। मजेदार बात यह है कि इन समितियों द्वारा हजारों रुपए की लागत से बनाए गए खेत तालाब या स्टॉप डेम में लाखों रुपए की लागत बताकर सरकारी खजाने का जमकर दोहन किया जा रहा है। विडंबना यह है कि बिल-व्हाउचर के आधार पर विभागीय अधिकारी निर्माण और विकास कार्यों की प्रशासनिक या तकनीकी स्वीकृति भी बेधड़क जारी कर देते हैं, जो जांच का विषय है। जिले में संचालित स्टॉप डेम और राजीव गांधी खेत तालाब योजनाओं की स्थिति को देखकर सहज अनुमान लगाया जा सकता है कि विभाग के अधिकारियों द्वारा शासन की किसान कल्याणकारी योजनाओं को किस तरह पलीता लगाया जा रहा है।

इन समितियों के जिम्मे है योजना का दायित्व :

जिले में उन्नत कृषि और किसानों की बेहतरी के स्टॉप डेम और खेत तालाब सहित स्व-सहायता समूहों को रोजगार के अधिकाधिक अवसर मुहैया कराने का जिम्मा जिन समितियों को दिया गया है, उनमें आईडब्ल्यूएमपी-2 तरावली कलां सहित आईडब्ल्यूएमपी-3 कलारा, आईडब्ल्यूएमपी-4 हिनौती सड़क, आईडब्ल्यूएमपी-5 एनजीओ, आईडब्ल्यूएमपी-6 मनख्याई, आईडब्ल्ूयएमपी-7 ललोई, आईडब्ल्यूएमपी-8 रमपुरा बालाचोन, आईडब्ल्यूएमपी-9 महिन्द्रा एंड महिन्द्रा के अलावा आईडब्ल्यूएमपी-11 आदि शामिल हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो इन समितियों के अधीन भी लगभग सवा सौै से अधिक छोटी-छोटी समितियां गठित की गई हैं, जो स्थानीय आधार पर डीपीआर के अनुसार कृषि विकास की योजनाओं के लिए काम कराती हैं।

वाटरशेड में बड़े घोटाले की आशंका :

विभागीय आंकड़ों के मुताबिक सरकार द्वारा किसान हितों के संदर्भ में संचालित वाटर शेड और खेत तालाब निर्माण योजना के क्रियान्वयन में समिति प्रभारियों, ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के चलते इन योेजनाओं के संचालन में अनियमितताओं और घोटाले की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। विभागीय सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि कई स्थानों पर तो ये योजनाएं कागजों में ही संचालित हैं। उधर किसानों का भी कहना है कि इन योजनाओं के संदर्भ में औचक स्थल निरीक्षण और छापामार कार्रवाई की जाए तो जमीनी हकीकत की तस्वीर स्वत: स्पष्ट हो जाएगी। गौरतलब है कि करीब दो साल पहले भी इस मुद्दे को जिला पंचायत की बैठक में उठाया गया था, लेकिन अब तक भी इस दिशा में विभागीय तौर पर कोई सार्थक कदम नहीं उठाए गए।

समितियां दे रहीं डेम और समूह की दुहाई :

वाटरशेड समितियोंकी कार्यप्रणाली को लेकर की गई पड़ताल में जो स्थिति सामने आई, उसमें किसी ने डेम निर्माण की बात कही, तो किसी ने स्व-सहायता समूह गठित कर स्वरोजगार को बढ़ावा देने का दावा किया। बैरसिया तहसील की रमपुरा बालाचोन समिति के लीडर हरिचरण अहिरवार ने कहा किउनकी संस्था के अंतर्गत करीब 11 गांवों में स्वसहायता समूहों का किया जाकर उन्हें लोन देकर आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि संस्था को शासन से करीब 540 लाख रुपए का बजट एप्रूव्ड हुआ है, जिसमें विभिन्न कार्यों की डीपीआर तैयार कराई जा रही है ताकि विकास कार्य कराए जा सकें।

इनका कहना है

जिले में संचालित वाटरशेड समितियों के सक्रिय क्रियान्वयन को लेकर अधिकारियों को अवगत भी कराया गया। हालांकि इस बीच जिला पंचायत के अधिकारियों के बार-बार तबादलों की प्रक्रिया चलती रही, जिससे योजनाओं का काम भी प्रभावित हुआ। अब शीघ्र ही स्थल निरीक्षण और योजना संचालन अधिकारियों और समिति प्रभारियों की बैठक लेकर समुचित समीक्षा की जाएगी।

– मनमोहन नागर, अध्यक्ष, जिला पंचायत भोपाल

मेरे द्वारा कार्यभार ग्रहण करने के बाद शनै:शनै: सभी योजनाओं के सक्रियता लाई जा रही है। वाटरशेड और खेत-तालाब योजनाओं में भी तेजी आई है। वाटरशेड समितियों के कार्यों की समीक्षा को लेकर शीघ्र ही एक बैठक ली जाएगी।

हरजिन्दर सिंह, सीईओ, जिला पंचायत भोपाल

 

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