चित्रकूट उपचुनाव : कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाने की तैयारी कर रही भाजपा

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जिताऊ चेहरे खोज रहीं दोनों पर पार्टियां
भोपाल। चित्रकूट विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद अब दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों में प्रत्याशी चयन की माथापच्ची शुरू हो गई है। कांग्रेस में प्रत्याशी चयन को लेकर जहां अभी कुछ भी तय नहीं है, वहीं भाजपा के एक ही सीट से दस दावेदारों के नाम चुनाव समिति के पास पहुंच चुके हैं। दस नामों के कारण चुनाव समिति ने किसी भी एक नाम को फाइनल करने के बजाय प्रदेशाध्यक्ष चौहान को अधिकृत कर दिया कि वे फीडबैक लेकर किसी भी एक के नाम की घोषणा कर दें। अब नंदकुमार चौहान प्रत्याशी चयन से पहले दावेदारों की ग्राउंड रिपोर्ट चेक करेंगे और फीडबैक मिलने के बाद ही प्रत्याशी का नाम केंद्रीय समिति तक पहुंचाया जाएगा। भाजपा के सामने चित्रकूट सीट जीतना जरूरी भी है और एक बड़ी चुनौती भी, क्योंकि ये सीट कांग्रेस के पास ही रही है और कांग्रेस के गढ़ में जीत का परचम लहराना भाजपा के लिए आसान नहीं होगा। इसलिए भाजपा जिताऊ चेहरे पर ही दांव लगाएगी। बता दें कि राष्ट्रीय अध्यक्ष ने 200 पार का लक्ष्य दिया है, मिशन 2018 से पहले इस चुनौती को पार करके दिखाने शाह के लक्ष्य और दी गई जिम्मेदारी पर खरा उतरने के लिए भाजपा कोई चूक नहीं करना चाहती है और जिताऊ चेहरे पर ही दांव लगाकर स्टार प्रचारकों के भरोसे माहौल बनाएगी। मुख्यमंत्री पहले ही कई दौरे कर चुके हैं और एक बार फिर अपने प्रत्याशी को जिताने के लिए दिन-रात एक करेंगे।

-टिकट की रेस में यह दावेदार आगे
आगामी नौ नवंबर को होने वाले चित्रकूट उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रत्याशी कौन होगा, इसके लिए दावेदारों की जोर आजमाइश शुरू हो चुकी है। टिकट की दौड़ में प्रमुख रूप दो नाम रेस में आगे चल रहे हैं। पूर्व विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार और पूर्व डीएसपी पन्नालाल अवस्थी के बीच टिकट की जोर आजमाइश जारी है, वहीं वरिष्ठ नेताओं के मुख पर यही दो नाम चढ़े हुए हैं। हालांकि टिकट मांगने वालों की कतार में तीसरा नाम दीनदयाल शोध संस्थान से जुड़े भरत पाठक की पत्नी नंदिता पाठक का भी है। नंदिता पाठक के समर्थन में संघ के होने से उनका दावा भी बेहद मजबूत माना जा रहा है। भाजपा की ओर से पिछला विधानसभा चुनाव हारे सुरेन्द्र सिंह गहरवार इस बार भी प्रवल के रूप में उभरे हैं। गहरवार के बारे कहा जा रहा है कि उनका ग्रामीण इलाकों में बेहतर वर्चस्व है।

– पन्नलाल अवस्थी का भी दिख रहा जनाधार
डीएसपी की नौकरी से इस्तीफा देकर राजनीति में सक्रिय हुए पन्नालाल अवस्थी भी टिकट मांग रहे हैं। पिछले दिनों मुख्यमंत्री से इनकी मुलाकात ने भी सरगर्मियां बढ़ाई है। अवस्थी लंबे समय तक चित्रकूट में एसडीओपी रहे हैं। उन्होंने चित्रकूट में दानादाताओं के जरिए 3 करोड़ से ज्यादा के कंबल गरीबों के बंटवाए। जिससे उनकी छवि कंबल वाले एसडीओपी की रही है। मंदाकिनी के सफाई अभियान में उन्होंने मप्र, यूपी के डेढ़ लाख लोगों को जोड़ा। साथ ही हर गांव में समितियां बनाई। पुलिस अधिकारी का नेटवर्क को देखकर भाजपा ने उन पर डोरे डाले और पार्टी की सदस्यता दिलाई।  इसके बाद से ही अवस्थी ने चित्रकूट में उपचुनाव की तैयारी कर दी। सोशल मीडिया के जरिए भी उन्होंने खुद को चित्रकूट से विधानसभा चुनाव लड़ने के संकेत दिए। अब उन्हें टिकट देकर भाजपा मजबूत प्रत्याशी बना सकती है। ये चुनाव कांग्रेस और भाजपा दोनों के लिए संजीवनी का काम करेंगे, इसलिए कांग्रेस भी सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखने के लिए पूरा जोर लगा रही है। विधायक प्रेमसिंह के निधन से यह सीट खाली हुई थी, इसलिए पार्टी में विचार चल रहा है कि उन्हीं की दत्तक पुत्री को टिकट दे दिया जाए।

दीवाली पूर्व हुई बैठक रही थी बेनतीजा
गौरतलब है कि दीवाली पूर्व प्रदेश भाजपा कार्यालय में हुई प्रदेश चुनाव समिति की बैठक भी बेनतीजा रही थी, क्योंकि 10 नाम आने से एक नाम पर कोई सहमति नहीं बन सकी थी। हालांकि अब शीघ्र ही किसी नाम पर मोहर लगाई जाएगी।

इन दावेदार के नामों पर चर्चा
भाजपा चुनाव समिति की बैठक में जिन दस दावेदों के नाम आए, उनमें सुरेंद्र सिंह गहरवार, पन्नालाल अवस्थी, कृष्ण मिश्र, शंकरदयाल त्रिपाठी, रामनाथ मिश्रा, डॉ. हर्षनारायण सिंह बघेल, चंद्रकमल त्रिपाठी, सुभाष शर्मा, डोली, रत्नाकर चतुर्वेदी और नंदिता पाठक शामिल हैं।

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