दो हजार रुपए नहीं दिये तो प्रसूता को किया नजरअंदाज

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डॉक्टर की मनमानी से मरीजों की जान जोखिम में
भगवानसिंह मीणा
कुरावर। एक तरफ जहां मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान और मध्यप्रदेश सरकार प्रदेश के नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर नित नई योजनाओं को अमल में लाने की बात कर रहे हैं, वहीं राजगढ़ जिले के कुरावर में संचालित शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंंद्र में वर्षों से पदस्थ डॉ नरेश गवली की मनमानी से यहां आने वाले मरीजों को हमेशा जान का खतरा बना रहता है। दरअसल डॉक्टर गवली की दोगली नीति के चलते समीपस्थ ग्राम मोयली कलां की एक प्रसूता को इन्फेक्शन हो गया और वह आज भी महिला को इलाज के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। गौरतलब है कि गत 9 जुलाई को मोयली कलां निवासी मनोज द्वारा उनकी पत्नी को प्रसव के लिए शासकीय अस्पताल कुरावर में रात करीब 8 बजे भर्ती कराया गया। यहां करीब 14 साल से पदस्थ डॉ. नरेश गवली ने मरीज के परिजनों का बताया कि पेट में बच्चा उल्टा है, आॅपरेशन से डिलेवरी होगी। इसलिए मरीज को भोपाल ले जाओ। जब परिजनों ने महिला को अधिक दर्द होने और एक बार जांच करने की गुजारिश की तो डॉक्टर भड़क गए और पुलिस थाने में बंद कराने की धमकी देने लगे। अंतत: परिजनों ने  किराये कार में महिला को भोपाल ले जाने के लिए बिठाते हुए नर्स से रेफर पर्ची मांगी। इस पर नर्स ने कहा कि समय लगेगा, आपको जल्दी है तो दो हजार दो या फिर इंतजार करो। इस पर महिला के परिजनों ने दो हजार रुपए देने में असमर्थता व्यक्त करते हुए महिला के प्रसव पीड़ा से कराहने की बात कही तो नर्स ने भी गाली- गलौज करते हुए डॉक्टर को बुलाया और डॉक्टर भी आते ही महिला के परिजनों को गाली बकते हुए थाने बंद करने की धमकी दी। इस्ी दौरान दर्द से तड़पती महिला को कार में ही नॉर्मल तरीके से प्रसव हो गया। इसके बाद महिला के परिजनों ने इसकी शिकायत नरसिंहगढ़ जाकर एसडीएम  और राजगढ़ में कलेक्टर से भी शिकायत की, लेकिन अब तक कहीं से कोई कार्यवाही नहीं हुई, जिससे डॉक्टर के हौसले और बुलंद हैं, जबकि मरीजों को जान का जोखिम उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अभी मैंने कलेक्टर तक शिकायत की है, लेकिन इस मामले को मैं मुख्यमंत्री तक ले जाऊंगा।
और भी हैं मामले :
कुरावर के शासकीय स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर की मनमानी का यह पहला प्रकरण नहीं है। इससे पहले पिछले साल प्रसव पीड़ा से कराहती पांच महिलाओं को बिना निडिल बदले ग्लूकोज की एक ही बॉटल लगाने का मामला सामने आ चुका है। इसमें फरियादी बाबूलाल बघेला ने बताया कि गत वर्ष 5 नवंबर 2016 को वह अपनी पत्नी को डिलेवरी के लिए कुरावर के प्रा. स्वास्थ्य केंद्र लाए, जहां रात्रि करीब साढ़े 8 बजे भर्ती किया गया। बाबूलाल बघेला ने बताया कि भर्ती करने के बाद करीब आधी रात को उनकी पत्नी को प्रसव हुआ। उसके बाद नर्सों ने उनसे 700 रुपए की मांग की और रुपए न देने पर एक ही ग्लूकोज की बॉटल को थोड़ा-थोड़ा करके पांच महिलाआें को लगाया गया। उन्होंने बताया कि बॉटल लगाने में निडिल तक नहीं बदली, जिससे उनकी पत्नी को इन्फेक्शन हो गया। बघेला ने बताया कि इन्फेक्शन के चलते उनकी पत्नी को आज एक साल से निरंतर इलाज कराना पड़ रहा है और वह एक साल से बीमार ही चल रही हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी :
कुरावर के शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चल रही इस तरह की मनमानी और धांधलियों की शिकायत नहीं मिली है, इस कारण इन घटनाओं की मुझे जानकारी नहीं है। अब शिकायत मिलने पर मैं स्वयं दिखवाती हूूं।
– तन्वी हुड्डा, एसडीएम नरसिंहगढ़

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