मप्र के राजस्व अधिकारी तीन दिन की सामूहिक हड़ताल पर

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भोपाल। राज्य सरकार द्वारा राजस्व प्रकरणों में देरी पर अधिकारियों से एक लाख तक की वसूली संबंधी घोषणा और इंदौर में अधिकारियों के निलंबन से नाराज प्रदेश भर में तहसीलदार और नायाब तहसीलदार बुधवार से तीन दिन की हड़ताल पर जाएंगे। यदि इसके बाद भी राज्य सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानी तो उन्होंने एक माह के सामूहिक तौर एक माह के अर्जित अवकाश का अल्टीमेटम सराकर को दिया है।
संघ पदाधिकारियों ने कहा कि सरकार द्वारा अपने निर्णय में उचित बदलाव नहीं किया तो 6 से 8 सितंबर तक सभी तहसीलदार और नायब तहसीलदार अपने अपमान के विरोध में सामूहिक अवकाश लेंगे। मप्र राजस्व अधिकारी संघ का कहना है कि यदि सरकार ने तीन दिन के अवकाश के बाद भी संघ की मांगें नहीं मानीं तो प्रदेश भर में तहसीलदार और नायाब तहसीलदार सामूहिक तौर एक माह के अर्जित अवकाश पर चले जाएंगे। अगले माह 3 अक्टूबर के पहले निराकरण न होने एवं किसी भी राजस्व अधिकारी के विरुद्ध कोई कार्रवाई होने की दशा में समस्त अधिकारी अर्जित अवकाश पर चले जाएंगे। मप्र राजस्व अधिकारीसंघ प्रदेश सरकार द्वारा नामांतरण, सीमांकन और बंटवारे पेंडिंग रखने पर एक लाख रुपए का जुर्माना और सीएम के तहसीलदारों को उल्टा टांगने के बयान का विरोध कर रहा है।

ये है मामला
गौरतलब है कि मुख्य सचिव बीपी सिंह ने कहा था कि राजस्व मामलों का निपटारा समय-सीमा में नहीं होने की स्थिति में तीन माह तक किसी भी अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसके बावजूद भी मुख्य सचिव बीपी सिंह तथा राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा इंदौर में हाल ही में दो तहसीलदारों पर कार्रवाई करते हुए निलंबित कर दिया था।

ये हैं प्रमुख मांगें
–  लोकसेवा गारंटी अधिनियम के तहत जुर्माना, सीएम हेल्पलाइन एवं जनसुनवाई में न्यूनतम समय-सीमा में निराकरण करने का दबाव बंद हो।
-राजस्व प्रकरणों के संबंध में एक लाख रुपए ईनाम जैसी घोषणाएं वापस हों।
-इंदौर में राजस्व अधिकारियों के निलंबन को वापस किया जाए।

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