वायुसेना को मिली बड़ी कामयाबी, उड़ते विमान में भरा ईंधन

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वायुसेना को मिली बड़ी कामयाबी, उड़ते विमान में भरा ईंधन

नई दिल्ली। भारतीय वायुसेना आए दिन नए-नए कीर्तिमान अपने नाम कर रही है। गुरुवार के दिन भी वायुसेना ने ऐसा कारनामा किया है जिसके बारे में जानकर कोई भी हैरत में पड़ जाए।
दरअसल, वायुसेना के स्वदेशी एम्ब्रायर ट्रांसपोर्ट विमान ने हवा में ही उड़ते हुए दूसरे विमान में र्इंधन भरने में सफलता हासिल की है। वायुसेना के विमान के जरिए ऐसा कारनामा पहली बार किया गया है। इसमें सफलता हासिल करने के बाद वायुसेना के लिए इसे बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। क्योंकि, अब कई मौकों पर वायुसेना के विमानों को ईंधन भराने के लिए जमीन पर लैंड कराने की जरूरत नहीं होगी। हाल ही में भारतीय वायुसेना ने सुखोई विमान के जरिए सुपरसोनिक मिसाइल ब्रहमोस का सफल परीक्षण कर दुनिया को नई ताकत का अहसास भी कराया था। सामरिक महत्व में इसे भारत की बड़ी कामयाबी के तौर पर भी देखा जा रहा है।

क्या फायदा होगा?
– आईएएफ के मुताबिक, फ्लाइट के दौरान महज 10 मिनट की रिफ्यूलिंग के चलते एयरक्राफ्ट की उड़ान क्षमता में 4 घंटे का इजाफा हो जाता है। इस कामयाबी के चलते एयरफोर्स की आॅपरेशन कैपेबिलिटी में शानदार इजाफा हुआ है।

-क्यों था ये जरूरी?
– ब्राजील में बने एम्ब्रेयर-145 में सिस्टम लगा है। ये सिस्टम एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड रडार, सेकंडरी सर्विलांस रडार, इलेक्ट्रॉनिक एंड कम्युनिकेशन काउंटर मेजर्स, छडर (लाइन आॅफ साइट), वॉयस कम्युनिकेशन सिस्टम, सेल्फ प्रोटेक्शन सूट जैसी तकनीकों का मेल है।  इस मॉडर्न टैक्नीक से लैस एम्ब्रेयर एक ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट है। एयर-टू-एयर रीफ्यूलिंग की कैपेबिलिटी इसलिए जरूरी कही जा सकती है, क्योंकि इससे इस विमान का फ्लाइंग टाइम बढ़ाया जा सकेगा और वो ज्यादा वक्त तक सर्विलांस कर सकेगा।

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