शिक्षकों का देर से आना-जल्दी जाना बदस्तूर जारी, बच्चों का भविष्य दांव पर

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मप्र के गुरुजी: जब शिक्षक देर से आए तो कौन बच्चों को पढ़ाए ?

सीहोर। शिक्षा के स्तर को बेहतर बताने वाली सरकार के दावे सीएम शिवराज के गृह जिले में ही फेल होते नजर आ रहे हैं। टीचर्स की मनमानी की वजह से बच्चों का भविष्य दांव पर है। छात्र पढ़ने तो आ जाते हैं, लेकिन शिक्षक नहीं पहुंचते। सीहोर के आलदाखेड़ी की शासकीय प्राथमिक शाला की हालत बेहद खराब है। यहां बच्चे तो टाइम से आ जाते हैं, लेकिन टीचर स्कूल खुलने के एक घंटे बाद आती हैं और एक घंटे पहले चली जाती हैं। स्कूल के दौरान भी ज्यादातर समय बातों में गुजरता है।

बच्चों की पढ़ाई पर नहीं टीचर्स का ध्यान
ग्रामीणों और छात्र-छात्राओं ने बताया कि दोनों मैडम लेट आती हैं और जल्दी चली जाती है। साथ ही पढ़ाई कराने की जगह फोन पर बात करती रहती हैं। बच्चे खेलने में मशगूल रहते हैं और मैडम बातें करने में।

पहले आना और पहले जाना
जिला मुख्यालय से मात्र चार किलोमीटर दूर स्थित ग्राम आलदाखेड़ी के प्राथमिक शाला का समय वैसे तो 10 से 5 बजे तक का है, लेकिन यहां पर पदस्थ शिक्षाकर्मी 11 बजे तक स्कूल आती हैं। मीडिया जब पहुंची तो यहां पर 40 से अधिक स्कूली छात्र-छात्राएं स्कूल खुलने के इंतजार में खेलते हुए नजर आए।

स्कूल में लगा ताला
पूछताछ पर ग्रामीणों ने बताया कि यहां पर पदस्थ शिक्षिकाएं रोज ही निर्धारित समय से एक घंटे देरी से स्कूल आती है और एक घंटे पहले स्कूल बंद करके चली जाती हैं। स्कूल समय में भी अक्सर मोबाइल पर ही बातें करती रहती हैं। इन्हीं कारणों के चलते गांव के अधिकतर लोग अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ने के लिए भेजते हैं।

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