माँ-बाप सोच रहे बच्चा पढ़ने जा रहा स्कूल पर शिक्षक लगवा रहे झाड़ू

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शिक्षिका ने कहा बच्चे झाड़ू नहीं लगाएंगे तो क्या हम लगाएंगे
अपनी दुर्दशा खुद बयां कर रहा रातीखेड़ा माध्यमिक विद्यालय
तो कैसे सुधरे शिक्षा का स्तर
अशोकनगर। शासन द्वारा भले ही स्कूलों की व्यवस्था सुधारने और शिक्षको का वेतन बढ़ाने के लिए पानी की तरह पैसा वहाया जा रहा हो, लेकिन बाबजूद इसके शासकीय स्कूलो में व्यवस्थाएं सुधारने का नाम नहीं ले रहीं हैं। स्कूलों के शिक्षकों द्वारा शासन के सारे नियम कानूनों को ताक पर रख कर अपनी मनमर्जी से स्कूलों का संचालन किया जा रहा है। पूरी तरह प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारियो से वेखौफ  होकर ये शिक्षक अपनी मर्जी से मन माफिक समय पर स्कूल खोलते हंै या फिर स्कूल जाना या न जाना ये अपने मन के मुताबिक ही तय करते हंै। इस मामले में जब ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे शासकीय स्कूलो की ग्राउंड रिपोर्ट देखी गई तो काफी दयनीय स्थिती सामने आई।

शासकीय माध्यमिक विद्यालय रातीखेड़ा में दोपहर करीब 12 बजे तक ताले लटके हुए थे और स्कूल के बच्चे शिक्षकों के आने के इंतजार में दरवाजे पर खड़े थे। इस मामले में जब ग्रामीणों से बीत की गई तो उनका कहना था कि यहा स्कूल हमेशा लेट लतीफ  ही खुलता है और कई मर्तबा तो स्कूल खुलता भी नही है। वहीं जब विद्यालय में यूडीटी सोमलत्ता पंंत 12 बजे स्कूल पहुंची तो उनका बेटा स्कूल का ताला खोलता नजर आया। वहीं आधे घंटे बाद सहायक शिक्षक जहीर अहमद कुरैशी स्कूल आए तो उनका कहना था कि मुझे गाड़ी चलाना नही आती है इसलिए वह लेट आए है। आपको जो लगे वो कर लो।

बच्चे नहीं तो कौन लगायेगा झाड़ू
अभिभावक अपने बच्चों को पढऩे लिखने के लिए स्कूल भेजते है लेकिन अभिभावको को यह पता चले कि स्कूलों में उनके बच्चों से झाड़ू लगवाना, साफ सफाई करवाना, फर्श बिछवाना जैसे कार्य करवाए जाते हंै तो उन पर क्या बीतेगी। दरअसल ऐसा ही नजारा शासकीय माध्यमिक विद्यालय रातीखेड़ा में देखने को मिला। स्कूल स्टॉफ  के सामने ही कुछ बच्चे स्कूल में भरा पानी साफ कर रहे थे। तो वही कुछ बच्चियां झाडू लगा रहीं थी। इसके अलावा शिक्षको को बैठने के लिए कुर्सी रखने तक का काम बच्चों से जबरन करवाया जाता है। इस मामले में जब शिक्षिका सोमलत्ता पंत से बात की गई तो उन्होंने दो टूक शब्दो में कहा कि बच्चे झाडू नहीं लगायेगें तो क्या हम लगायेगें।

शौचालय न होने से होती है परेशान
शासकीय माध्यमिक विद्यालय रातीखेड़ा में शौचालय की स्थिती खराब होने की बजह से स्कूलों में पढऩे वाले बच्चों को काफी परेशानी उठानी पड़ती है। तो वही इस सबंध में बच्चों से चर्चा की गई तो बच्चों ने बताया कि उन्हें शौच के लिए घर जाना पड़ता है। इसके अलावा स्कूल में पढऩे वाली बालिकाओं ने बताया कि वह बाथरूम आने पर भी उन्हे घर की ओर रूख करना पड़ता है।

इनका कहना है।
जो भी शिक्षक लापरवाही करते हैं या समय पर स्कूल नहीं खोलते है उन पर कार्रवाई होगी। ऐसे शिक्षक समाज के लिए घातक है शासकीय माध्यमिक विद्यालय रातीखेड़ा में भी जांच की जाएगी।
आदित्य नारायण मिश्रा
जिला शिक्षा अधिकारी अशोकनगर

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